हिंदू और मुस्लिम दो आँखें

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मध्यकाल का इतिहास

शंभूनाथ शुक्ल

हमारे यहां सबसे अंधेरा है मध्यकालीन इतिहास। इसे उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में जैसे अंग्रेजों ने हमें पढ़ाया वैसा ही हम जानते हैं। इसी का नतीजा है हिंदू मुस्लिम परस्पर घृणा और असामंजस्य। हिंदू मुस्लिम संबंध कोई आज के नहीं हजार साल से अधिक पुराने हैं पर उनके साथ बरतने का इतिहास हमारे पास सिर्फ 1857 के बाद का है।

– अगर हिंदू मुस्लिम संबंध इतने ही गड़बड़झाले वाले होते तो आखिर क्या वजह थी कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में सब ने बहादुर शाह जफर को ही अपना नेता माना।

– आखिर क्यों मध्यकाल के सारे काव्य में मुसलमानों और मुस्लिम शासकों के खिलाफ एक भी शब्द नहीं सुनाई पड़ती। जबकि तमाम कवियों ने मुसलमानों के धार्मिक कर्मकांड की खूब खिल्ली उड़ाई है। जैसे कबीर, पलटू, दादू आदि ने।

– भक्त कवि तुलसीदास ने पूरे काव्य में कहीं भी मंदिर तोड़े जाने या मुसलमान शासकों की कथित असहिष्णुता पर कुछ भी नहीं लिखा।

– मुगल शासक आगरा से हिंदुस्तान पर राज करते थे पर उनकी ही नाक के नीचे मथुरा में भक्त कवियों का जमावड़ा था और उनमें से किसी ने भी मुगलों यहां तक कि औरंगजेब के कथित अत्याचारों पर कुछ नहीं लिखा।

– जबकि यही कवि अकबर द्वारा फतेहपुर सीकरी बुलाए जाने पर नहीं जाते थे और उलटे ताना देते थे- संतन को कहा सीकरी सो काम, आवत जात पनहियां टूटी बिसर गए हरिनाम।

– गुरु नानक ने बाबर के संदर्भ में एक जगह बस इतना ही लिखा है- खुरासान खसमाना कीया, हिंदुस्तान डराया।

– अलाउद्दीन खिलजी के समय मलिक मोहम्मद जायसी थे और उन्होंने अपने सारे काव्य में हिंदू धर्म के विरुद्घ कहीं कुछ नहीं लिखा। जायसी ने यह जरूर लिखा है कि ऊपर वाले ने कई धर्म बनाए और उनमें से मोहम्मद का धर्म श्रेष्ठ है। यहां आग्रह दुराग्रह कहीं नहीं है।

– मुस्लिम पठान शासक यदि हिंदुओं से जजिया लेते थे तो मुस्लिम प्रजा से जकात। दोनों लगभग समान थे।

– धन के लिए यदि मुस्लिम शासकों ने मंदिर तोड़े तो हिंदू शासकों ने भी तोड़े।

– अगर मुस्लिम शासक अत्याचारी थे तो भारत में दिल्ली के अलावा जो हिंदू सुल्तानेट थे वहां रहने वाले जरूर इन शासकों के विरुद्घ कुछ लिखते।

– रीति काल में भूषण ने शिवाजी की वीरता का बखान करते हुए उन्होंने उन्हें म्लेच्छों का उच्छेदक बताया है। पर यहां म्लेच्छों का मतलब विदेशी है और शिवाजी को पहले बीजापुर के सुल्तान से बाद में हिंदुस्तान के बादशाह से भिडऩा पड़ा था इसलिए ऐसा लिखा है वर्ना भूषण ने कहीं भी मुस्लिम शासकों को हिंदू द्वेषी नहीं बताया है।

– औरंगजेब अगर हिंदू कुल द्रोही होता तो महाराजा जसवंत सिंह उसके मुख्य सलाहकार क्यों होते?

– औरंगजेब के समय कौन सा मंदिर तोड़ा गया, इसका उल्लेख जरूर मिलता क्योंकि तब तक राजपूताना, बुंदेलखंड और महाराष्ट्र और मालवा में हिंदू शासक बहुत ताकतवर थे।

– मथुरा और आगरा में जिस गोकुल जाट के विद्रोह का जिक्र है वह धार्मिक कम बल्कि औरंगजेब द्वारा अंतिम दिनों में कर बढ़ा देने के कारण हुआ।

– परवर्ती काल में 17वीं और 18वीं सदी में कहीं भी मुस्लिम शासकों द्वारा किसी तरह के हिंदू विरोधी कार्यों का ब्योरा नहीं मिलता। चाहे वह मथुरा के वैष्णवन की वार्ता का साहित्य हो अथवा सखी संप्रदाय या ललित किशोरी पंथ का या राधा संप्रदाय का।

– जहांगीर के बारे में कहा जाता है कि उसने इटावा के 36 हजार ब्राह्मणों का सिर हाथियों से कुचलवा दिया था। पर एक तो गंग कवि अकबर के दरबारी कवि थे और उनकी जहांगीर से दुश्मनी जग जाहिर थी लेकिन इस घटना का जिक्र कहीं मिलता नहीं है बस इटावा और आसपास ऐसी जनश्रुति है।

– संगीत सम्राट तानसेन अपनी मर्जी से ब्राहमण से इस्लाम पंथानुयायी बने थे। यह भी जनश्रुति ही है। वर्ना उन्हीं के समकालीन बीरबल तो नहीं बने।

– दूसरी सबसे अहम बात अगर मुस्लिम शासक धन या तलवार से इस्लाम फैलाते तो हिंदुओं की तमाम जातियां मुस्लिम होतीं पर तथ्य यही बताते हैं कि मुस्लिम धर्म अधिकतर राजपूतों और पेशेवर जातियों ने ही अपनाया। कृषक जातियों में उसका असर कम पड़ा। ब्राह्मण और भूमिहार भी इस्लाम की शरण में गए। मगर सबसे कम संख्या में दलितों ने इस्लाम पंथ अपनाया।

– और इसकी वजह थी कि मुस्लिम शासकों ने हिंदू धर्म की सामाजिक संरचना से छेड़छाड़ नहीं की।

– वे अपने में मगन रहे और हिंदू अपने में।

– अलबत्ता यूरोपियन खासकर ब्रिटिशर्स जब भारत आए तो उन्होंने सबसे अधिक धर्मान्तरण किया। मुसलमानों का भी और हिंदुओं का भी। इसीलिए हिंदू मुसलमान दोनों ही समुदायों में आचार भ्रष्ट का मतलब ख्रिस्तान हो जाना था।

– पर भाइयो अब ब्रिटिशर्स भी भारत से भागकर जा चुके हैं और मुसलमान अपने ही भाई हैं सो अब छोड़ो रार और परस्पर भाइयों की तरह रहो।

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One thought on “हिंदू और मुस्लिम दो आँखें

  1. SAJID RANA

    सर, सलाम आपको और शुक्रिया इस लेख का…सच कहा है आपने हिंदू और मुस्लिम दो आँखें

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