भारत देश की आखिरी धरती!

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भारत देश की आखिरी धरती!
शंभूनाथ शुक्ल
अगर आप लोगों ने चेन्नई एक्सप्रेस फिल्म देखी हो तो याद होगा, उसमें एक सीन है जब समुद्र की लहरों के बीच शाहरुख खान अपने दादा की अस्थियां विसर्जित कर रहा है। वह जगह रामेश्वरम से आठ किमी आगे धनुषकोटि है। एक तरह से भारत का आखिरी किनारा। वहां एक आल सोल चर्च के पास बोर्ड लगा है जिसके अनुसार अंग्रेज सरकार पहले एक छोटी लाइन टे्रन वहां चलाती थी जो आसपास के गांवों तक पहुंचने का अकेला माध्यम हुआ करती थी। पर 1964 के समुद्री तूफान ने ऐसा कहर बरपा कर दिया कि वह रेल लाइन समुद्र में समा गई और कई गांव भी। मैं जब वहां की यात्रा पर था तो इच्छा हुई कि उस समुद्री रेल लाइन के आसपास की परिक्रमा की जाए। पर यह बहुत जोखिम वाला काम था और एक प्वाइंट तो ऐसा आता था जहां से श्रीलंका मात्र 12 किमी रह जाता था। हालांकि लोकल मछुआरे वहां के कुछ गांवों में रहते थे। पर उनके आने-जाने का समय निर्धारित नहीं होता था। और एक बाहरी आदमी के लिए तो वहां जाने की मनाही थी। लेकिन अपन ठहरे जिद्दी ठान लिया सो ठान लिया। कई लोगों से अनुनय विनय करने के बाद एक पिकअप वाला राजी हुआ और बोला कि आपसे दो हजार रुपये लूंगा और जो सवारियां चढ़ाऊँगा उनका पैसा मैं रखूंगा आपको ऐतराज नहीं होना चाहिए। साथ में हिदायत भी दी कि कुछ हो गया तो मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं। मैने कहा चलो ठीक है। आखिर वहां मर भी गए तो क्या स्वर्ग की सीढ़ी पक्की। आखिर श्रीलंका के तट पर मरना कोई सामान्य बात तो है नहीं। चल पड़े यात्रा अत्यंत खतरनाक और जोखिम भरी थी। कई जगह तो वह पिकअप वैन दलदल में फंस जाती तो उतर कर धक्का देना पड़ता। कई मछुआरी औरतें भी थीं जो हिंदी टूटी फूटी बोल लेती थीं। मैने पूछा तो बोली हमारे यहां हिंदी के टीवी सीरियल जो आते हैं। एक औरत ने मुझे अपने घर आने का न्यौता दिया। उसका गांव एकदम उजाड़। पीने के पानी के लिए रेत में एक गड्ढा खोद रखा था जिसमें से एक बूढ़ा मोबिल आयल के डिब्बे में पानी निकालता जो चिल्लू लगाकर पीना पड़ता। पानी अदभुत रूप से मीठा था। बुड्ढे की दाढ़ी एकदम रामस्वामी पेरियार सरीखी। एक बार तो मुझे भ्रम हुआ कि कहीं यह रामस्वामी पेरियार का ही पुनर्जन्म तो नहीं है। हुबहू वैसा ही रूप रंग। वहां एक उजाड़ सा रेत पर बना खंडहर हो चुका चर्च था और पार्वतीम्मा का मंदिर भी। वे लोग दोनों की पूजा करते थे। पार्वतीअम्मा की इसलिए कि वे कुलदेवी थीं और चर्च इसलिए कि वे अब ईसाई थे। खाने को मछली का झोल अथवा सूखी मछली, कुछ चावल। वहां से चारो तरफ 1964 के पूर्व की रेल लाइन के अवशेष समुद्र में दीखते हैं। नीले पानी के बीच वे अवशेष सुंदर लगते हैं। कुछ का दावा है कि ये अवशेष रामसेतु के हैं जो राम नाम के एक राजा ने श्रीलंका पर हमला करने हेतु बनाया था। पर आज तक उनके हक में कोई ठोस सबूत नहीं मिला। खुद तमिलनाडु के लोग इस कथा को सही नहीं मानते जबकि पूरे देश में तमिलनाडु अकेला ऐसा प्रदेश है जहां हिंदू आबादी 96 प्रतिशत के आसपास है।
खास बात यह है कि उस निर्जन और अनजाने देश में मुझे एक गेरुआ वस्त्र धारी साधु मिले। मगर वे इस निर्जन प्रदेश में कैसे आ गए, यह पता नहीं चला। उन्होंने मुझसे लौटते वक्त रामेश्वरम तक की लिफ्ट मांगी थी। लेकिन एक बात का रहस्य मुझे आज तक नहीं पता चला कि वे मेरे अपने बारे में काफी कुछ ऐसा बता गए जो सही था। मेरे अतीत के बारे में भी और भविष्य के बारे में भी।

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4 thoughts on “भारत देश की आखिरी धरती!

  1. shriniwas rai shankar

    क्या बताया था ,गेरुवेधारी ने जरा हमें भी सुनाते आप तो अच्छा लगता।

  2. कमलनयन

    सर आगे का पढने के लिए लिंक खोला लेकिन ……’ मेरे अतीत के बारे में भी और भविष्य के बारे में भी’ यही खत्म हो गया….क्या बताया उस गेरुवेधारी ने.

  3. मुकुन्द हरि

    फेसबुक पर आपने लिखा था कि उन गेरुकधारी की बातें यहां ब्लॉग पर पढने को मिलेंगी किन्तु यहां तो लगता है आपने दंडी मार दी सर. अब कैसे चलेगा बताइए !

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