Rana Alihasan Chauhan

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राणाअलीहसन चौहान पाकिस्तान के मशहूर इतिहासकार थे। जाति के गुर्जर थे।उन्होंने गुर्जर जाति का इतिहास ‘ए शार्ट हिस्ट्री आफ द गुरजर्स’ लिखी है।इस पुस्तक को हिंदी में गुर्जर एकता परिषद, देवधर, हरियाणा ने छापा है।श्री ओमप्रकाश गुर्जर, चौधरी शफकत जंग गुर्जर, चौधरी जमशेद जंग गुर्जर औरडॉ ओम सिंह चौहान ने मिलकर इसका अनुवाद किया है। राणा अलीहसन चौहान, जोहिंदी और संस्कृत भी बहुत अच्छी तरह लिख और समझ लेतेथे, ने इसके अनुवाद का जो अधिकार पत्र गुर्जर एकता परिषद को दिया है उसमेंराणा साहेब की नागरी लिपि में लिखावट और वाक्य विन्यास संस्कृत के ज्यादाकरीब है। राणा अलीहसन चौहान ने इस पुस्तक की प्रस्तावना में लिखा है- “अंग्रेजी में यह पुस्तक मैने डॉ गुलाम सरवर अध्यक्ष फारसी विभाग कराचीविश्वविद्यालय के आग्रह पर लिखी है।” उन्होंने बताया है- “गुलाम सरवर साहबगूजरों के कालस गोत्र से हैं और झेलम जिले के रहने वाले हैं। उनके कालसगांव वाले पुराने घर में लकड़ी का एक बहुत बड़ा स्तंभ है। जो छत केअत्यंतभारी शहतीर को थामे हुए है। इस स्तंभ में उनके परिवार का नाम राजा की पदवीके साथ खुदा है। उन्हें ईरान का सर्वश्रेष्ठï बौद्घिक पदक निशाने सियास भीमिल चुका है।” पाकिस्तान के शिक्षा विभाग में इस पुस्तक को लगवाने के लिएउन्होंने पाक शिक्षा अधिकारी डा सफदर महमूद का आभार जताते हुए बताया है- “सफदर महमूद गुजरात जिले के रहने वाले तथा गूजरों की खटाना खाप के हैं औरपाकिस्तान के शिक्षा विभाग में सचिव हैं।” राणा अलीहसन चौहान ने भारतीयलेखक और राजनीतिक केएम मुंशी का भी आभार जताया है जिनकी पुस्तक ‘द ग्लोरीदैट वाज गुर्जर देश’ से उन्हें बड़ी मदद मिली। इस पुस्तक के शुरुआती पेजोंपर ही जिन गुर्जर महानात्माओं का काल्पनिक और वास्तविक चित्र अंकित है, वेहैं- प्रथम गुर्जर सम्राट महाराज दशरथ, गुर्जरी माता यशोदा, वीरांगना पन्नाधाय, क्रांतिकारी विजय सिंह पथिक गुर्जर, सरदार बल्लभ भाई पटेल (लेवागुर्जर), श्री फखरुद्दीन अली अहमद (कसाना गुर्जर), पाकिस्तान के पूर्वराष्टï्रपति श्री फजल इलाही (विजाड़ गुर्जर) और श्री राजेश पायलट (विधूड़ीगुर्जर)। पुस्तक में शुक्राचार्य को असुर गुरु बताते हुए लिखा हैकि वेमहान ऋषि भृगु के पुत्र थे और ये यही भृगु हैं जिन्होंने विष्णु की छाती परलात से प्रहार किया था। तथा शुक्राचार्य की पुत्री राजा ययाति से ब्याहीथी जिसके यदु नाम का पुत्र था और जिसके वंशज यादव कहलाते हैं। देव असुरोंके परस्पर संपर्कों का वर्णन करते हुए राणा अली हसन ने श्रीराम को गुर्जरप्रतिहार क्षत्रिय बताया है तथा राजा जनक को सांवर असुर का पुत्र। राणा अलीहसन ने तमाम आर्य और असुर नायकों का वर्णन करते हुए गुर्जरों को मूल रूपसे आर्य और क्षत्रिय बताया है। इस पुस्तक में कश्मीर का प्रामाणिक इतिहासकल्हण की राजतरंगिणी के हवाले से दिया गया है।

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साल 2013 की 19 जुलाई को मेरा यह लेख अमर उजाला के संपादकीय पेज पर छपा था। इस लेख के छपते ही फेसबुक पर बड़ा हंगामा बरपा हुआ था। उस समय के तमाम वामपंथी और दक्षिणपंथी छद्म धर्मनिरपेक्ष बौद्घिकों ने खूब ड्रामा किया था। कुछ मुस्लिम मित्र छोड़कर चले गए और एक तो इस कदर नाराज हो गया कि एक उर्दू अखबार में मेरा नियमित कालम छापने का वायदा करने के बाद मुकर गए। लेकिन क्या यह एक पत्रकारीय धर्म नहीं है कि वह समाज की नब्ज पहचान कर हकीकत को बयान करे। लेख प्रस्तुत है जो आज से करीब एक साल पहले अमर उजाला में छपा था।

http://earchive.amarujala.com/svww_zoomart.php?Artname=20130719a_012101003&ileft=770&itop=197&zoomRatio=466&AN=20130719a_012101003